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एम्स पटना बनेगा हेल्थ इनोवेशन का हब, चिकित्सक दिवस पर लॉन्च हुई नई ग्रांट योजना

रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों व संकाय सदस्यों को किया गया सम्मानित
पटना (टीएचटी)। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर एम्स पटना ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए द्वितीय इन्क्यूबेशन एवं इग्निशन ग्रांट कॉल का शुभारंभ किया। एम्स पटना इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन काउंसिल (एपीआईआईसी) द्वारा ब्लॉक चेन फॉर इम्पैक्ट (बीएफआई) के सहयोग से स्थापित एम्स पटना-बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों और छात्रों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तथा एपीआईआईसी के अध्यक्ष प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल रहे। उनके साथ चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, अधिष्ठाता (अनुसंधान) प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय, अधिष्ठाता (परीक्षा) प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार, अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, एपीआईआईसी की प्रधान अन्वेषक एवं ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. क्रांति भावना, सह-प्रधान अन्वेषक एवं ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार, एम्स पटना-बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर के प्रधान अन्वेषक डॉ. सुदीप कुमार तथा एपीआईआईसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मौसमी साहा सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। वहीं, बीएफआई की प्रोग्राम डायरेक्टर (मेडटेक इनोवेशन) डॉ. श्वेता जिंदल तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के प्रौद्योगिकी अनुवाद एवं नवाचार प्रभाग के प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एपीआईआईसी के द्वितीय इन्क्यूबेशन एवं इग्निशन ग्रांट कॉल का शुभारंभ रहा। इसके तहत चिकित्सा, मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, बायोटेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और अन्य स्वास्थ्य क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, नवप्रवर्तकों तथा स्टार्टअप्स से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

चयनित प्रतिभागियों को इग्निशन ग्रांट के रूप में आर्थिक सहायता के साथ विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, एम्स पटना की क्लीनिकल एवं अनुसंधान सुविधाओं का उपयोग, बौद्धिक संपदा (आईपी) संबंधी सहायता, नियामकीय प्रक्रियाओं में सहयोग, प्रौद्योगिकी परीक्षण तथा उद्योग से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उनके नवाचार आम लोगों तक पहुंच सकें।

इस दौरान बीएफआई फुल स्टैक इनोवेशन प्रोग्राम की भी जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम नवप्रवर्तकों को किसी भी नए विचार को प्रोटोटाइप, क्लीनिकल परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग प्रदान करता है।

मुख्य अतिथि प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि एम्स पटना का लक्ष्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता मिलकर देश की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान तैयार करें। उन्होंने विश्वास जताया कि एपीआईआईसी और एम्स पटना-बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर पूर्वी भारत में स्वास्थ्य नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
कार्यक्रम के समापन पर रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों, मार्गदर्शकों और वरिष्ठ संकाय सदस्यों को सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम स्वास्थ्य क्षेत्र में नए विचारों को प्रोत्साहन देने, युवा नवप्रवर्तकों को अवसर उपलब्ध कराने और देश के लिए सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य समाधान विकसित करने की दिशा में एम्स पटना की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बना।