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एम्स पटना में स्वच्छता पखवाड़ा का आगाज़

पटना (टीएचटी)। स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में ‘स्वच्छता पखवाड़ा 2026’ की शुरुआत बुधवार को शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुई। 1 से 15 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में संस्थान परिसर में स्वच्छता को जन-आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।
संस्थान के प्रशासनिक भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगे.) डॉ. राजू अग्रवाल की उपस्थिति ने आयोजन को दिशा प्रदान की। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार, उप-चिकित्सा अधीक्षकगण, संकाय सदस्य, अधिकारी, नर्सिंग एवं प्रशासनिक कर्मियों की व्यापक भागीदारी रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यकारी निदेशक ने कहा कि स्वच्छता केवल नियम नहीं, बल्कि एक जीवन-मूल्य और संस्कार है, जिसे हर व्यक्ति को अपने व्यवहार में अपनाना चाहिए।
स्वच्छता पखवाड़ा के तहत आगामी पंद्रह दिनों में संस्थान में विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। अस्पताल परिसर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए स्वच्छता संदेश और बैनर लोगों को जिम्मेदारी का एहसास करा रहे हैं। इस दौरान दो महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। संस्थान परिसर में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, साथ ही इसे “नो टोबैको ज़ोन” घोषित किया गया है। ये पहल स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। संस्थान ने इस अभियान को केवल निर्देशों तक सीमित न रखते हुए सहभागिता का रूप दिया है। सभी कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे अपने नवाचारपूर्ण सुझावों के माध्यम से इस पहल को और प्रभावी बनाएं।
स्वच्छता पखवाड़ा को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार और चेतना के रूप में देखा जा रहा है। यह संदेश देता है कि किसी भी अस्पताल की पहचान केवल उसके उपचार से नहीं, बल्कि उसके स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण से भी होती है। जब देश स्वच्छ भारत मिशन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब एम्स पटना एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में उभर रहा है, जहाँ स्वच्छता केवल दिखाई ही नहीं देती, बल्कि हर स्तर पर महसूस भी की जाती है।