डॉक्टरों-नर्सों को ‘गोल्डन मिनट’ में जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण
पटना (टीएचटी)। नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद के सबसे नाजुक समय में सुरक्षित जीवन देने के उद्देश्य से एम्स पटना में ‘बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम ट्रेनिंग-ऑफ-ट्रेनर्स (एनआरपी टीओटी)’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के सहयोग से आयोजित इस एकदिवसीय प्रशिक्षण में डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को ‘गोल्डन मिनट’ के दौरान जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव देने के लिए ‘सिमुलेटेड डिलीवरी रूम’ तैयार किया गया, जहां ‘पेरिनाटल एस्फिक्सिया’ जैसी गंभीर स्थितियों में नवजात को बचाने के उपायों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस जन्म के तुरंत बाद के ‘गोल्डन मिनट’ पर रहा, जिसमें समय पर सही हस्तक्षेप से नवजात की जान बचाई जा सकती है।
कार्यक्रम में संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने प्रतिभागियों से इस प्रशिक्षण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और अधिक से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने का आह्वान किया। वहीं, डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। आईएपी बिहार शाखा के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) निगम प्रकाश नारायण ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नवजात देखभाल को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला का नेतृत्व डॉ. ओम प्रकाश ने किया, जबकि समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. रिची दलाई ने संभाली। विशेषज्ञों की टीम में डॉ. अमित कुमार, डॉ. भावेश कांत चौधरी, डॉ. रामेश्वर प्रसाद और डॉ. केशव कुमार पाठक शामिल रहे। इनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आपात स्थितियों में कार्य करने का आत्मविश्वास भी विकसित किया।
केरल और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण पूरा कर ‘बेसिक एनआरपी ट्रेनर’ की जिम्मेदारी संभालने का संकल्प लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में इस प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने की बात कही, ताकि नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए एक मजबूत और प्रशिक्षित नेटवर्क तैयार किया जा सके।