
फुलवारीशरीफ में खप्पड़ पूजा परिक्रमा निकाला गया, आग को हाथ में लेकर दौड़ते रहे
पटना l सावन माह के पावन अवसर पर फुलवारी शरीफ प्रखंड कार्यालय स्थित शीतला माता मंदिर से खप्पड़ पूजा (डाली पूजा) की परंपरागत यात्रा रविवार को धूमधाम से निकाली गई। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु तलवार और लाठी के साथ माता रानी की जयकारा लगाते हुए नगर परिक्रमा में शामिल हुए। यह परिक्रमा प्रखंड कार्यालय स्थित शीतला माता मंदिर के सामने से होते होते हुए टमटम पड़ाव, चौराहा, पेठिया बाज़ार होते पूना वापस मंदिर प्रस्थान कर गया l
इस अनोखी पूजा की खासियत यह है कि मंदिर के भगत (मुख्य पुजारी) अपने हाथ में जलते हुए खप्पड़ (मिट्टी का पात्र) लेकर दौड़ते हैं। उनके पीछे-पीछे भक्तजन महिला पुरुष, बुजुर्ग, युवाव युवती माता रानी की जय-जयकार करते हुए पूरे नगर की परिक्रमा करते हैं। यह दृश्य श्रद्धा, आस्था और जोश से परिपूर्ण होता है। हाथ में तलबार, भाला और लाठी के साथ परिक्रमा में मौजूद थे श्रद्धालू, इस दौरान याता यात की पूर्ण रूप से दो घंटे तक वाधित रहा l
गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल
परिक्रमा जब फुलवारी शरीफ चौराहा पहुंची, तो नगर परिषद अध्यक्ष आफताब आलम ने श्रद्धालुओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी परिक्रमा में शामिल भक्तों का खुले दिल से स्वागत किया, जिससे क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहज़ीब की शानदार झलक देखने को मिली। यह भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का अनोखा उदाहरण बना।
करीब 200 वर्षों पुरानी है यह परंपरा : शीतला माता मंदिर के पुजारी संतोष बाबा ने बताया कि यह पूजा लगभग 200 वर्षों से लगातार की जा रही है। प्रत्येक वर्ष सावन महीने में सात दिनों तक सुबह-शाम महिला और पुरुष श्रद्धालु मंदिर में दूध और गंगाजल चढ़ाते हैं। सातवें दिन खप्पड़ पूजा की यात्रा निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
पूजा समिति के सदस्य देवेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने माता के प्रति अपार आस्था और भक्ति का प्रदर्शन किया।
ब्रिटिश काल में हुई महामारी से जुड़ी है मान्यता: इस पूजा की शुरुआत के पीछे एक ऐतिहासिक कथा जुड़ी है। बताया जाता है कि ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1818 में फुलवारी शरीफ क्षेत्र में भीषण महामारी फैल गई थी। महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की असमय मृत्यु हो गई थी। तभी शीतला माता मंदिर के तत्कालीन पुजारी झमेली बाबा को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए और पूजा-अर्चना करने को कहा।
इसके बाद झमेली बाबा ने लगातार नौ दिनों तक मां शीतला की आराधना की। पूजा समाप्त होते ही क्षेत्र में महामारी का असर कम होने लगा और धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त हो गया। तभी से यह परंपरा आज तक अखंड रूप से निभाई जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद : इस विशाल आयोजन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। मौके पर पटना पश्चिम सिटी एसपी भानु प्रताप, फुलवारी शरीफ डीएसपी सुशील कुमार, फुलवारी, बेउर और जानीपुर थानेदार समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की सक्रियता से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस मौके पर हरेंद्र सिंह, अभय सिंह, सुजीत कुमार, रमेश यादव, मनोज सिंह, मनोज यादव, शंकर गुप्ता समेत बड़े संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद थेl