एम्स पटना में बाल कैंसर पर राष्ट्रीय कार्यशाला, विशेषज्ञों ने साझा किए उपचार और पहचान के गुर
-समय पर पहचान और उचित रेफरल से बचाई जा सकती हैं हजारों बच्चों की जान : डॉ. राजू अग्रवाल
पटना (टीएचटी)। बच्चों में कैंसर की समय पर पहचान और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के शिशु रोग विभाग ने बिहार पेडिकॉन-2026 के प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप के तहत नेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम – प्रैक्टिकल पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी का सफल आयोजन किया। बाल कैंसर के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आयोजित यह कार्यशाला ज्ञान, कौशल और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। कार्यशाला में बिहार के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से आए 25 प्रतिभागियों, जिनमें स्नातकोत्तर प्रशिक्षु, शिशु रोग विशेषज्ञ और नर्सिंग अधिकारी शामिल थे, ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल कैंसर की शीघ्र पहचान, प्रभावी उपचार और समन्वित देखभाल के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बच्चों में कैंसर की समय पर पहचान और उचित रेफरल व्यवस्था हजारों बच्चों का जीवन बचा सकती है। उन्होंने बाल कैंसर देखभाल को और अधिक सशक्त बनाने के लिए विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और बहुविषयक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर प्रभारी डीन (अकादमिक) प्रो. अजीत कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रशांत कुमार सिंह तथा डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. रुचि सिन्हा भी उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने चिकित्सा शिक्षा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की महत्ता को रेखांकित किया।
कार्यशाला के वैज्ञानिक सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इनमें डॉ. चंद्र मोहन कुमार (एम्स पटना), डॉ. अमित कुमार और डॉ. संतोष कुमार (मेदांता अस्पताल), डॉ. आशुतोष (महावीर कैंसर संस्थान), डॉ. अरुंधति (पीएमसीएच) तथा डॉ. नेहा सिंह (एम्स पटना) शामिल थीं। विशेषज्ञों ने बाल कैंसर के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान दिए।
सत्रों में बाल कैंसर की महामारी विज्ञान, कैंसर प्रबंधन के मूल सिद्धांत, लिम्फ नोड की सूजन, पेट में गांठ, पैनसाइटोपीनिया, ऑन्कोलॉजिकल आपात स्थितियां तथा कैंसर के शुरुआती चेतावनी संकेतों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि प्राथमिक स्तर पर चिकित्सक कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर लें, तो उपचार की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा हैंड्स-ऑन स्किल ट्रेनिंग रहा, जहां प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने प्रक्रियात्मक कौशल, नैदानिक निर्णय क्षमता और रोगी प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि बाल कैंसर के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बिहार पेडिकॉन-2026 की शृंखला में आयोजित यह कार्यक्रम एम्स पटना की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार नए मानदंड स्थापित कर रहा है।
कार्यक्रम का समापन बाल कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर पहचान, सही उपचार और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका पर बल देने के साथ हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव इन्हीं तीन स्तंभों पर टिकी है और इसी संदेश के साथ कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई।