फतुहा CHC में वर्षों से जमे डॉक्टर पर सवाल, आरोपों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
पटना (टीएचटी)l पटना जिले के फतुहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात चिकित्सा पदाधिकारी डॉ गणपत मंडल को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है। डॉ मंडल पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, इसके बावजूद उनकी तैनाती में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया है। वर्ष 2017 में उन पर मेडिकल कॉलेज में नामांकन दिलाने के नाम पर लगभग 1.46 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप लगा था। इस मामले में पटना के कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपों के बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई और वे करीब 71 दिनों तक जेल में रहे।
इसके अलावा, डॉ मंडल पर ड्यूटी में लापरवाही और बिना सूचना अनुपस्थित रहने के कई मामले भी सामने आते रहे हैं। विभागीय स्तर पर उनसे स्पष्टीकरण जरूर मांगा गया, लेकिन कार्रवाई के मामले में कठोरता नजर नहीं आई। ऐसे में सवाल उठता है कि गंभीर आरोपों के बावजूद उन्हें लगातार जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा रही है।


लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती, रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप
डॉ गणपत मंडल पिछले करीब 10 वर्षों से फतुहा में ही पदस्थापित हैं, जो सामान्य प्रशासनिक नियमों के विपरीत माना जाता है। एक ही स्थान पर इतनी लंबी अवधि तक तैनाती को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि कई बार बिना पूर्व सूचना के ड्यूटी से गायब रहने की शिकायतें भी दर्ज हुईं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखा।
21 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान भी डॉ मंडल की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन वे कार्यक्रम से अनुपस्थित पाए गए। इस लापरवाही के बाद उन्हें प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पद से हटाया गया, हालांकि बाद में पुनः उसी स्वास्थ्य केंद्र में उनकी तैनाती कर दी गई।
इसी क्रम में जनवरी 2025 का एक मामला भी सामने आया, जिसमें उपस्थिति पंजी में कथित छेड़छाड़ की बात कही गई। आरोप है कि 20 से 25 जनवरी तक अनुपस्थित रहने के बावजूद बाद में रिकॉर्ड में बदलाव कर उपस्थिति दर्ज कर दी गई। इस घटना ने अस्पताल की आंतरिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही और कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।