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रिजवान पैलेस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिया वक्फ बोर्ड के हक में: अफजल अब्बास

पटना (टीएचटी)l बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड में पंजीकृत मूल्यवान संपत्तियों में से एक रिजवान पैलेस है जो डाक बंगला चौराहे के पास लबे सड़क स्थित है। यह संपत्ति हसन इमाम वक्फ एस्टेट, पटना का एक बड़ा हिस्सा है, जिसे 1929 में हसन इमाम द्वारा वक्फ किया गया था और 1931 में स्वर्गीय हसन इमाम द्वारा वक्फ के रूप में पंजीकृत किया गया था। यह वक्फ संपत्ति 122 कट्ठा है जो माननीय पटना उच्च न्यायालय के आदेशानुसार जिला प्रशासन की निगरानी में है। माननीय पटना उच्च न्यायालय ने विविध. केस संख्या 1248/2007 के आदेश दिनांक 14.02.2012 में पटना उच्च न्यायालय के दो वरिष्ठ जज को Arbitrator की हैसियत से और year award 1935, 1936 के तहत पटना उच्च न्यायालय ने रिज़वान पैलेस और इसकी समर्पित भूमि को वक्फ के रूप में मान्यता दी। इस फैसले में, पटना उच्च न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट, पटना को रिजवान पैलेस और उसकी समर्पित भूमि को अपनी निगरानी में लेने और भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए एक पुलिस बल तैनात करने का भी आदेश दिया। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद अफजल अब्बास ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट वक्फ निगरानी आयुक्त भी है और अदालत के आदेशों के कार्यान्वयन में जिला मजिस्ट्रेट की जवाबदेही अनिवार्य है। रिजवान पैलेस पर लंबे समय से भू-माफियाओं की बुरी नजर थी, लेकिन निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सब ने इस संपत्ति को हसन इमाम वक्फ एस्टेट का अटूट हिस्सा मानते हुए शिया वक्फ बोर्ड और हसन इमाम वक्फ इस्टेट के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने SLP नं0 6307-6308/2017 के जरिए पटना हाई कोर्ट के दिनांक 03-03-2025 के फैसले को बरकरार रखा।

अध्यक्ष ने कहा कि रिजवान पैलेस, जो शिया वक्फ बोर्ड की बहुमूल्य सम्पत्ति है उसे हासिल करने के लिए कानूनी करवाई की जाएगी ताकि इस बहुमूल्य वक्फ संपत्ति से सामाजिक कल्याण के लिए बेहतर और सकारात्मक कार्य किया जा सके।