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एम्स : दवाओं के दुष्प्रभावों की समय पर रिपोर्टिंग से मजबूत होगी मरीजों की सुरक्षा
www.todayhindtimes.com 23 Sep 77 views हेल्थ

एम्स : दवाओं के दुष्प्रभावों की समय पर रिपोर्टिंग से मजबूत होगी मरीजों की सुरक्षा

मरीज, परिजन और आम लोग भी दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी देकर फार्माकोविजिलेंस में निभा सकते हैं अहम भूमिका
पटना, टीएचटी। एम्स पटना के फार्माकोलॉजी विभाग स्थित एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर की ओर से मंगलवार को फार्माकोविजिलेंस पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम आयोजित किया गया। “फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक कदम” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं के सही इस्तेमाल, दुष्प्रभावों की पहचान और उनकी समय पर रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक किया गया।
भारत सरकार के भारतीय भेषज संहिता आयोग के तत्वावधान में 6वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2026 के तहत आयोजित कार्यक्रम में एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि किसी भी दवा का इस्तेमाल उसकी जरूरत, लाभ और संभावित जोखिम को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने एंटीबायोटिक के तर्कसंगत इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि जब एंटीबायोटिक की जरूरत न हो, तब उसे नहीं लिखने का निर्णय भी चिकित्सकीय समझ और आत्मविश्वास की मांग करता है।
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) बिकाश मेधी ने दवाओं की लगातार निगरानी और संभावित दुष्प्रभावों की समय पर पहचान को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। वहीं भारतीय भेषज संहिता आयोग के नेशनल कोऑर्डिनेशन सेंटर-फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आर.एस. रे ने प्रतिकूल दवा प्रभावों की रिपोर्टिंग के महत्व पर प्रकाश डाला।
नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बिहटा के प्राचार्य एवं आईजीआईएमएस, पटना के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एमेरिटस प्रो. (डॉ.) हरिहर दीक्षित ने सोशल फार्माकोविजिलेंस की अवधारणा पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं है। दवा लेने के बाद किसी तरह का असामान्य प्रभाव या परेशानी होने पर मरीज और उनके परिजन इसकी जानकारी स्वास्थ्यकर्मी को दें। जरूरत पड़ने पर इसकी रिपोर्टिंग भी की जानी चाहिए।
सीएमई में स्वास्थ्यकर्मियों, फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों और विद्यार्थियों ने दवाओं के उचित इस्तेमाल, दुष्प्रभावों की पहचान और रिपोर्टिंग समेत मरीजों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में फार्माकोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर के कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रमोद कुमार मांझी ने अतिथियों, विशेषज्ञ वक्ताओं, फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट्स, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताया।